क्षेत्रीय आकांक्षाएँ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान नोट्स

Contents hide
1 क्षेत्रीय आकांक्षाएँ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान नोट्स क्षेत्रीय आकांक्षाएँ राष्ट्र नागरिको से बनता है और नागरिक राष्ट्र के शिखर और आधार दोनों होते है l नागरिको की की आवश्यकता और आकांक्षाएँ अलग अलग होती है l देश मे विभिन्न नागरिक विभिन्न तरह से अपनी व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से मांगे रखते है l ये मांगे देश के अलग अलग क्षेत्रों से होती है l इसलिए इन्हें क्षेत्रीय आकांक्षाएँ कहा जाता है l भारत में तनाव के दायरे आज़ादी के तुरंत बाद देश दो विभाजन, विस्थापन और देशी रजवाड़ों का विलय और राज्यों के पुनर्गठन जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ा l आज़ादी के तुरंत बाद जम्मू कश्मीर का मुद्दा और फिर पूर्वोत्तर में नागालैंड के साथ साथ मिजोरम में भी भारत से अलग होने की आजाज बुलंद हुई l दक्षिण भारत में द्रविण आन्दोलन के जरियें भारत से अलग होने की मांग उठी l इसके साथ ही उत्तर में पंजाब में अलग अधिक स्वायतत्ता के लिए मांग उठी l नए राज्यों की मांग भी राष्ट्र के लिए तनाव का विषय बना हुआ है l जम्मू और कश्मीर जम्मू और कश्मीर में तीन राजनितिक और सामाजिक क्षेत्र शामिल है : 1) जम्मू 2) कश्मीर 3) लद्दाख यहाँ पर मुस्लिम बहुसंख्यक और बौध्द तथा हिन्दू अल्पसंख्यक है l कश्मीर घाटी, जम्मू मैदानी और लद्दाख पहाड़ी इलाका है l यहाँ पर बोली जाने वाली भाषा कश्मीरी है l भारत और पाकिस्तान सन 1947 में कश्मीर के मुद्दे पर युद्ध में उल्लझ गए l पाकिस्तान ने कश्मीर पर कबाईली हमला करवाया और कश्मीर का एक बड़ा भाग हथिया लिया l कश्मीर समस्या की जड़ भारत के स्वतंत्र होने से पहले कश्मीर में राजशाही थी l स्वतंत्रता के पश्चात् इसके राजा हरी सिंह भारत और पाकिस्तान दोनों में से किसी में भी शामिल नहीं होना चाहते थे l वे स्वतंत्र रहना चाहते थे l राज्य की अधिकतर जनसँख्या मुस्लिम थी इसलिए पाकिस्तान मनाता था की इसका विलय पाकिस्तान में होना चाहिए जबकि राजा हरी सिंह हिन्दू थे l शेख अब्दुल्ला जो की एक धर्म निरपेक्ष संगठन नेशनल कांफ्रेंस के नेता थे, चाहते थे की महाराजा गद्दी छोड़े परन्तु वह पाकिस्तान में शामिल नहीं होना चाहते थे l अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने कबायली घुसपैठियों को अपनी तरफ से कश्मीर पर कब्ज़ा करने के लिए भेजा l मजबूरन महाराजा को भारतीय सेना की मदद लेनी पड़ी लेकिन भारत सरकार बिना विलय पत्र पर हस्ताक्षर करवाए मदद नही करना चाहती थी और इस प्रकार महाराजा ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किये l कश्मीर अब भारत का हिस्सा बन गया था l विलय पत्र पर हस्ताक्षर से पहले महाराजा ने कश्मीर की स्वायतत्ता और शांति पश्चात जनमत संग्रह की दो शर्त राखी थी जिसे मान लिया गया था l इसलिए धरा 370 के तहत जम्मू और कश्मीर को स्वायतत्ता दी गयी है l जम्मू कश्मीर का खुद का संविधान है, खुद का झंडा है, खुद का राष्ट्रगान है l तब से लेकर आज तक कश्मीर में आतंरिक और बाहरी दोनों प्रकार के विवाद बने हुए है l धारा 370 धारा 370 के तहत जम्मू कश्मीर को विशेष अधिकार मिले l रक्षा, विदेश और संचार मामलों को छोड़कर और किसी भी कानून पर भारत की संसद कानून नहीं बना सकती है l विशेष अधिकार होने की वजह से जम्मू और कश्मीर में भारतीय संविधान लागू नही होता है l राज्य का अपना संविधान है l जिसे 1956 में बनाया गया और 1957 में लागू किया गया l केंद्र का कानून लागू करने से पहले राज्य की सहमति जरूरी है l जम्मू कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून ही लागू होता है l यहाँ पंचायत के पास कोई अधिकार नहीं है l जम्मू कश्मीर में एक चपरासी को आज भी 2500 रुपये ही बतौर वेतन मिलता है l यहाँ पर शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार और महालेखा परीक्षक के अधिकार लागू नहीं होते है l यदि कोई कश्मीरी महिला भारतीय पुरुष से विवाह करती है तो उसकी कश्मीरी नागरिकता समाप्त हो जाती है वही पाकिस्तानी पुरुष से विवाह करने पर महिला की नागरिकता समाप्त नहीं होती और महिला के पति को भारतीय नागरिकता मिल जाती है l कश्मीर की राजनीति 1948 के बाद आज़ाद भारत में शेख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री बने l उन्होंने जम्मू कश्मीर में भूमि सुधार किया और जन कल्याणकारी नीतियाँ लागू की l कश्मीर की हैसियत से शेख अब्दुल्ला के विचार मेल नहीं खाते थे और इसलिए दोनों में मतभेद हो गए परिणामस्वरूप 1953 में अब्दुल्ला के सरकार को बर्खास्त कर दिया गया l 1953 से 1974 तक यहाँ पर कांग्रेस का शाया रहा और कांग्रेस के समर्थन से ही सरकार बनती रही l 1974 में शेख अब्दुल्ला और इंदिरा गाँधी के बीच एक समझौता हुआ और उसके बाद 1977 में राज्य में चुनाव करवाए गए जिसमे शेख अब्दुल्ला की सरकार बनी और वे मुख्यमंत्री बने l 1987 में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा और गठबंधन को बहुत भरी बहुमत मिला लेकिन जन भावना इसके विपरीत थी लोगो का मानना था की चुनाव में धांधली की गयी है l इससे पहले प्रशासनिक अक्षमता को लेकर भी कश्मीरियो में भारत के खिलाफ रोष पनप रहा था l इससे यहाँ पर उग्रवादी आन्दोलन हुए और 1989 आते आते कश्मीर उग्रवादियों की गिरफ्त में आ गया l इन उग्रवादियों को पाकिस्तान नैतिक, भौतिक और सैन्य सहायता दे रहा था l 1989 में अलगाववाद ने जन्म लिया l अलगाववादी चाहते थे की कश्मीर एक स्वतंत्र देश बने l कुछ अलगाववादी यह चाहते थे की इसका विलय पाकिस्तान में हो जाये वाही कुछ का मानना यह था की कश्मीर हिस्दुस्तान का ही हिस्सा रहे परन्तु उसे स्वायतत्ता दी जाये l 1996 में जम्मू और कश्मीर में एकबार फिर से विधानसभा चुनाव हुए और फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने l जम्मू कश्मीर के लोगो ने सेना और उग्रवाद दोनों को झेला है लेकिन अब वहां की आवाम शांति, विकास और रोजगार चाहती है l अब जम्मू और कश्मीर में पहले के मुकाबले शांति है l पंजाब पंजाब राज्य का गठन सन 1966 में धार्मिक और भाषाई आधार पर किया गया l पंजाब का गठन सिखों के राज्य रूप में किया गया l पंजाब राज्य बनाने की मांग सबसे पहले अकाली दल ने 1920 में उठायी थी लेकिन राज्य का गठन बहुत बाद में हुआ l पंजाब में रहने वाले लोग पंजाबी बोलते है l आज़ादी के बाद से ही पंजाब का धार्मिक अनुपात बदल गया था l पंजाब राज्य से काटकर ही हिमाचल प्रदेश और हरियाणा राज्य का गठन किया गया है l आकली दल ने सिख समुदाय के लिए सिख कौम की आकांक्षाओं पर बल दिया l अकाली दल ने 1973 में आनंदपुर साहिब में स्वायतत्ता की मांग उठाई l इसके लिए उन्होंने बहुत बड़े स्तर पर आन्दोलन चलाया l लेकिन आन्दोलन धीरे धीरे हिंसक होता चला गया l अकाली दल के दो गुट हो गये और अब आन्दोलन नरमपंथियों के हाथो से निकलकर चरमपंथियों के हाथो में चला गया l ये चरमपंथी अब सिख राष्ट्र खालिस्तान की मांग करने लगे l इसके लिए चरमपंथियों ने सशस्त्र विद्रोह शुरू किया l उन्होंने सिखों के धार्मिक स्थान अमृतसर मंदिर को हथियारबंद किले में तब्दील कर दिया l इन चरमपंथियों को पाकिस्तान सहायता दे रहा था l भारत सरकार ने सन 1984 में उग्रवादियों का सफाया करने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया l इस कार्यवाही में उग्रवादियों को सफाया हो गया लेकिन साथ ही अमृतसर मंदिर को भी भरी क्षति पहुंची थी l पंजाब समझौता प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने नरमपंथी अकाली दल से बातचीत शुरू की l तत्कालीन अकालीदल अध्यक्ष हरचंद सिंह लोगोंवाला के साथ जुलाई में एक समझौता किया l इस समझौते को राजीव लोंगोवाला या पंजाब समझौता कहा जाता है l समझौते के अनुसार चंडीगढ़ पंजाब को दे दिया गया और पंजाब तथा हरियाणा के विवाद के लिए एक आयोग बना दिया गया l इसके साथ ही रावी व्यास जल विवाद के लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन किया जाना था l उग्रवाद से प्रभावित लोग को मुआवजा दिया जाना था l पंजाब से विशेष सुरक्षा बल वापस लिया जाना शामिल था l शांति स्थापित करना पंजाब समझौते के लगभग एक दशक तक पंजाब में हिंसा होती रही l उग्रवाद को दबाने में की गयी कार्यवाहियों में व्यापक रूप से मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ l जैसे तैसे पंजाब में लोकतंत्र को बहल करने के लिए 1992 में चुनाव करवाए गए l इस चुनाव में मात्र 24 जनता ही मत डालने आयी l उग्रवाद को 1992 में आख़िरकार दबा दिया गया लेकिन इससे पंजाब की जनता को काफी दुःख उठाना पड़ा l 1997 के चुनाव के बाद यहाँ अकालीदल और भाजपा के गठबंधन की सरकार बनी l पंजाब अब धर्मनिरपेक्षता की ओर चल पड़ा है l 1997 से यहाँ पर शांति बनी हुई है l पूर्वोत्तर के राज्य भारत के उत्तर पूर्व में 7 राज्य अरुणांचल, असम,मेघालय,लगालैंड,मणिपुर,मिजोरम,और त्रिपुरा है l इस सातो राज्यों को सात बहिन के नाम से जाना जाता है l त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय खासी पहाड़ी क्षेत्र में आते है l इन तीनो ही राज्यों का गठन सन 1972 में हुआ था l नागालैंड का गठन 1960 में हुआ था वही अरुणांचल प्रदेश और मिजोरम का गठन 1986 में किया गया था l पूर्वोत्तर के राज्यों में मुख्य रूप से तीन मुद्दे हावी रहे ये थे : स्वयायात्ता की मांग , अलगाव के आन्दोलन और बाहरी लोगो का विरोध l स्वायतत्ता की मांग पहले पूर्वोत्तर में केवल तीन राज्य असम, मणिपुर और त्रिपुरा थे l केंद्र सरकार ने अलग अलग समय पर असम को बांटकर मेघालय, अरुणांचल प्रदेश और मिजोरम बनाया l समय समय पर पूर्वोत्तर के अलग अलग जनजातीय समुदायों ने स्वायतत्ता की मांग की l बड़े जनजातीय समुदायों ने मिलकर “इस्टर्न इंडिया ट्राइबल यूनियन” बनाया जो बाद में चलकर “आल पार्टी हिल्स कांफ्रेंस” में तब्दील हो गया l लगातार होते धरने प्रदर्शन और अन्द्लोलन से केंद्र सरकार को इनकी मांगो को मानना पड़ा l अलगाववादी आन्दोलन मिजो नेशनल फ्रंट मिजोरम के लोगो का मानना था की वे कभी भी ब्रिटिश इंडिया के अधीन नहीं रहे इसलिए वे स्वतंत्र देश बनाने की मांग करने लगे l 1959 में मिजो पर्वतीय इलाके में अकाल पड़ा और असम सरकार ने इसकी उपेक्षा की जिसकी वजह से लोगो में भारी असंतोष पनपा और इससे अलग राष्ट्र बनाने की मांग को बल मिला l गुस्साए लोगो ने लालडेन्गा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट की स्थापना की और 1966 में आज़ादी की मांग करते हुए सशत्र अभियान शुरू किया l भारतीय सेना और मिजो विद्रोहियों के बीच लगभग दो दशकों तक गुरिल्ला युद्ध चला l तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में मिजो विद्रोहियों ने अपने ठिकाने बनाये l दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा l आखिरकार भारत सरकार और मिजो विद्रोहियों के बीच समझौता हुआ 1986 में लालडेन्गा और राजीव गाँधी के बीच में समझौता हुआ और मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला l आज मिजोरम पूर्वोत्तर का सबसे शांत राज्य है l उसने कला, साहित्य और विकास की दिशा में प्रगति की है l बाहरी लोगो के खिलाफ आन्दोलन पूर्वोत्तर की एक सबसे बड़ी समस्या बाहरी लोगो का आकर यहाँ बस जाना था l आप्रवासियों को यहाँ के लोग अपने लिए खतरा मानते थे l अप्रवासी उनके रोजगार, भूमि और संसाधनों पर अपना कब्ज़ा कर रहे है ऐसा पूर्वोत्तर के लोगो का मानना है l 1979 से 1985 तक असम में बाहरी लोगो के खिलाफ काफी बड़े स्तर पर आन्दोलन हुए l स्थानीय निवासी उन्हें अपने राज्य से बहार करना चाहते थे l असामी लोगो का यह मानना है की बांग्लादेश से आकर बसे मुस्लिमों को अगर वापस नहीं भेजा गया तो असामी लोग एक दिन अल्पसंख्यक हो जायेंगे l असम में चाय, कॉफ़ी और तेल, कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधन होते हुए भी वहाँ बहुत बड़े स्तर पर गरीबी है l इसका मुख्य कारण बंगलादेशी आप्रवासियों को माना जाता है l AASU (ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ) आसू असम का एक छात्र संगठन था जिसका किसी भी राजनितिक दल से कोई सम्बन्ध नहीं था l इस संगठन ने विदेशियों को असम से बहार निकालने के लिए बहुत जी जबरदस्त आन्दोलन चलाया l आसू का आन्दोलन अवैध अप्रवासी, बंगाली और अन्य लोगो जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज कर लिए गए थे को असम से बाहर निकालना था l उनकी मांग थी की 1951 से पहले आने वाले सभी आप्रवासियों को असम से बहार निकला जाएँ l आन्दोलन से व्यापक स्तर पर जान माल की हानि के साथ साथ तेल और रेलगाड़ियों की आवाजाही को रोकने की कोशिश की गयी हैं l 6 वर्षों तक चले आन्दोलन का आखिरकार केंद्र सरकार के साथ समझौता होने के साथ अंत हुआ l 1985 में समझौता हुआ और समझौते के अनुसार बांग्लादेश युद्ध के दौरान और उसके बाद आये बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा जायेगा l समझौते के बाद आसू असम गण संग्राम परिषद् के साथ मिलकर एक राजनितिक पार्टी बन गयी l जिसका नाम था असम गण परिषद् l अब असम में शांति है परन्तु बाहरी लोगो का मुद्दा अभी हल नहीं हुआ है l बहुत बाद में केंद्र सरकार ने आखिरकार समझौते पर अमल करते हुए सन 2017 में असम का नागरिकता रजिस्टर (National Register of Citizenship NRC) की पहली लिस्ट जरी की है l NRC में 3.39 में से 2.89 करोड़ लोगो को नागरिकता के योग्य पाया गया है l लगभग 40 लाख लोगो को बाहरी माना गया है l क्षेत्रीय आकाँक्षाओं से मिलने वाले सबक पहला सबक यह है की क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतान्त्रिक राजनीति का अभिन्न अंग है l दूसरा सबक यह है की क्षेत्रीय आकाँक्षाओं को दबाने की जगह उनके साथ लोकतान्त्रिक बातचीत का तरीका अपनाना सबसे अच्छा होता है l तीसरा सबक सत्ता की साझेदारी के महत्त्व को समझना है l इसके अनुसार विभिन्न दलों और समूहों को केन्द्रीय राजव्यवस्था में हिस्सेदार बनाना जरूरी है l चौथा सबक यह है की आर्थिक विकास में सभी क्षेत्रों के साथ समानता का व्यवहार करना चाहियें l पिछड़ें राज्यों की आर्थिक मदद करके उनको विकास की रह पर लेकर आये l

क्षेत्रीय आकांक्षाएँ 
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान 
नोट्स  

क्षेत्रीय आकांक्षाएँ 

राष्ट्र नागरिको से बनता है और नागरिक राष्ट्र के शिखर और आधार दोनों होते है l नागरिको की की आवश्यकता और आकांक्षाएँ अलग अलग होती है l देश मे विभिन्न नागरिक विभिन्न तरह से अपनी व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से मांगे रखते है l ये मांगे देश के अलग अलग क्षेत्रों से होती है l इसलिए इन्हें क्षेत्रीय आकांक्षाएँ कहा जाता है l 

भारत में तनाव के दायरे 

  1. आज़ादी के तुरंत बाद देश दो विभाजन, विस्थापन और देशी रजवाड़ों का विलय और राज्यों के पुनर्गठन जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ा l 
  2. आज़ादी के तुरंत बाद जम्मू कश्मीर का मुद्दा और फिर पूर्वोत्तर में नागालैंड के साथ साथ मिजोरम में भी भारत से अलग होने की आजाज बुलंद हुई l 
  3. दक्षिण भारत में द्रविण आन्दोलन के जरियें भारत से अलग होने की मांग उठी l 
  4. इसके साथ ही उत्तर में पंजाब में अलग अधिक स्वायतत्ता के लिए मांग उठी l 
  5. नए राज्यों की मांग भी राष्ट्र के लिए तनाव का विषय बना हुआ है l 

जम्मू और कश्मीर 

  1. जम्मू और कश्मीर में तीन राजनितिक और सामाजिक क्षेत्र शामिल है : 1) जम्मू   2) कश्मीर     3) लद्दाख 
  2. यहाँ पर मुस्लिम बहुसंख्यक और बौध्द तथा हिन्दू अल्पसंख्यक है l 
  3. कश्मीर घाटी, जम्मू मैदानी और लद्दाख पहाड़ी इलाका है l 
  4. यहाँ पर बोली जाने वाली भाषा कश्मीरी है l 
  5. भारत और पाकिस्तान सन 1947 में कश्मीर के मुद्दे पर युद्ध में उल्लझ गए l पाकिस्तान ने कश्मीर पर कबाईली हमला करवाया और कश्मीर का एक बड़ा भाग हथिया लिया l

कश्मीर समस्या की जड़ 

  1. भारत के स्वतंत्र होने से पहले कश्मीर में राजशाही थी l स्वतंत्रता के पश्चात् इसके राजा हरी सिंह भारत और पाकिस्तान दोनों में से किसी में भी शामिल नहीं होना चाहते थे l वे स्वतंत्र रहना चाहते थे l 
  2. राज्य की अधिकतर जनसँख्या मुस्लिम थी इसलिए पाकिस्तान मनाता था की इसका विलय पाकिस्तान में होना चाहिए जबकि राजा हरी सिंह हिन्दू थे l 
  3. शेख अब्दुल्ला जो की एक धर्म निरपेक्ष संगठन नेशनल कांफ्रेंस के नेता थे, चाहते थे की महाराजा गद्दी छोड़े परन्तु वह पाकिस्तान में शामिल नहीं होना चाहते थे l 
  4. अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने कबायली घुसपैठियों को अपनी तरफ से कश्मीर पर कब्ज़ा करने के लिए भेजा l 
  5. मजबूरन महाराजा को भारतीय सेना की मदद लेनी पड़ी लेकिन भारत सरकार बिना विलय पत्र पर हस्ताक्षर करवाए मदद नही करना चाहती थी और इस प्रकार महाराजा ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किये l कश्मीर अब भारत का हिस्सा बन गया था l 
  6. विलय पत्र पर हस्ताक्षर से पहले महाराजा ने कश्मीर की स्वायतत्ता और शांति पश्चात जनमत संग्रह की दो शर्त राखी थी जिसे मान लिया गया था l 
  7. इसलिए धरा 370 के तहत जम्मू और कश्मीर को स्वायतत्ता दी गयी है l जम्मू कश्मीर का खुद का संविधान है, खुद का झंडा है, खुद का राष्ट्रगान है l 
  8. तब से लेकर आज तक कश्मीर में आतंरिक और बाहरी दोनों प्रकार के विवाद बने हुए है l 

धारा 370 

  1. धारा 370 के तहत जम्मू कश्मीर को विशेष अधिकार मिले l रक्षा, विदेश और संचार मामलों को छोड़कर और किसी भी कानून पर भारत की संसद कानून नहीं बना सकती है l 
  2. विशेष अधिकार होने की वजह से जम्मू और कश्मीर में भारतीय संविधान लागू नही होता है l राज्य का अपना संविधान है l जिसे 1956 में बनाया गया और 1957 में लागू किया गया l 
  3. केंद्र का कानून लागू करने से पहले राज्य की सहमति जरूरी है l
  4. जम्मू कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून ही लागू होता है l 
  5. यहाँ पंचायत के पास कोई अधिकार नहीं है l 
  6. जम्मू कश्मीर में एक चपरासी को आज भी 2500 रुपये ही बतौर वेतन मिलता है l 
  7. यहाँ पर शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार और महालेखा परीक्षक के अधिकार लागू नहीं होते है l 
  8. यदि कोई कश्मीरी महिला भारतीय पुरुष से विवाह करती है तो उसकी कश्मीरी नागरिकता समाप्त हो जाती है वही पाकिस्तानी पुरुष से विवाह करने पर महिला की नागरिकता समाप्त नहीं होती और महिला के पति को भारतीय नागरिकता मिल जाती है l  

कश्मीर की राजनीति 1948 के बाद 

  1. आज़ाद भारत में शेख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री बने l उन्होंने जम्मू कश्मीर में भूमि सुधार किया और जन कल्याणकारी नीतियाँ लागू की l 
  2. कश्मीर की हैसियत से शेख अब्दुल्ला के विचार मेल नहीं खाते थे और इसलिए दोनों में मतभेद हो गए परिणामस्वरूप 1953 में अब्दुल्ला के सरकार को बर्खास्त कर दिया गया l 
  3. 1953 से 1974 तक यहाँ पर कांग्रेस का शाया रहा और कांग्रेस के समर्थन से ही सरकार बनती रही l 
  4. 1974 में शेख अब्दुल्ला और इंदिरा गाँधी के बीच एक समझौता हुआ और उसके बाद 1977 में राज्य में चुनाव करवाए गए जिसमे शेख अब्दुल्ला की सरकार बनी और वे मुख्यमंत्री बने l 
  5. 1987 में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा और गठबंधन को बहुत भरी बहुमत मिला लेकिन जन भावना इसके विपरीत थी लोगो का मानना था की चुनाव में धांधली की गयी है l 
  6. इससे पहले प्रशासनिक अक्षमता को लेकर भी कश्मीरियो में भारत के खिलाफ रोष पनप रहा था l इससे यहाँ पर उग्रवादी आन्दोलन हुए और 1989 आते आते कश्मीर उग्रवादियों की गिरफ्त में आ गया l 
  7. इन उग्रवादियों को पाकिस्तान नैतिक, भौतिक और सैन्य सहायता दे रहा था l 
  8. 1989 में अलगाववाद ने जन्म लिया l अलगाववादी चाहते थे की कश्मीर एक स्वतंत्र देश बने l कुछ अलगाववादी यह चाहते थे की इसका विलय पाकिस्तान में हो जाये वाही कुछ का मानना यह था की कश्मीर हिस्दुस्तान का ही हिस्सा रहे परन्तु उसे स्वायतत्ता दी जाये l 
  9. 1996 में जम्मू और कश्मीर में एकबार फिर से विधानसभा चुनाव हुए और फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने l 
  10. जम्मू कश्मीर के लोगो ने सेना और उग्रवाद दोनों को झेला है लेकिन अब वहां की आवाम शांति, विकास और रोजगार चाहती है l अब जम्मू और कश्मीर में पहले के मुकाबले शांति है l 

पंजाब 

  1. पंजाब राज्य का गठन सन 1966 में धार्मिक और भाषाई आधार पर किया गया l पंजाब का गठन सिखों के राज्य रूप में किया गया l
  2. पंजाब राज्य बनाने की मांग सबसे पहले अकाली दल ने 1920 में उठायी थी लेकिन राज्य का गठन बहुत बाद में हुआ l 
  3.  पंजाब में रहने वाले लोग पंजाबी बोलते है l आज़ादी के बाद से ही पंजाब का धार्मिक अनुपात बदल गया था l 
  4. पंजाब राज्य से काटकर ही हिमाचल प्रदेश और हरियाणा राज्य का गठन किया गया है l 
  5. आकली दल ने सिख समुदाय के लिए सिख कौम की आकांक्षाओं पर बल दिया l अकाली दल ने 1973 में आनंदपुर साहिब में स्वायतत्ता की मांग उठाई l 
  6. इसके लिए उन्होंने बहुत बड़े स्तर पर आन्दोलन चलाया l लेकिन आन्दोलन धीरे धीरे हिंसक होता चला गया l 
  7. अकाली दल के दो गुट हो गये और अब आन्दोलन नरमपंथियों के हाथो से निकलकर चरमपंथियों के हाथो में चला गया l 
  8. ये चरमपंथी अब सिख राष्ट्र खालिस्तान की मांग करने लगे l इसके लिए चरमपंथियों ने सशस्त्र विद्रोह शुरू किया l 
  9. उन्होंने सिखों के धार्मिक स्थान अमृतसर मंदिर को हथियारबंद किले में तब्दील कर दिया l इन चरमपंथियों को पाकिस्तान सहायता दे रहा था l 
  10. भारत सरकार ने सन 1984 में उग्रवादियों का सफाया करने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया l इस कार्यवाही में उग्रवादियों को सफाया हो गया लेकिन साथ ही अमृतसर मंदिर को भी भरी क्षति पहुंची थी l

पंजाब समझौता 

  1. प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने नरमपंथी अकाली दल से बातचीत शुरू की l 
  2. तत्कालीन अकालीदल अध्यक्ष हरचंद सिंह लोगोंवाला के साथ जुलाई में एक समझौता किया l
  3. इस समझौते को राजीव लोंगोवाला या पंजाब समझौता कहा जाता है l 
  4. समझौते के अनुसार चंडीगढ़ पंजाब को दे दिया गया और पंजाब तथा हरियाणा के विवाद के लिए एक आयोग बना दिया गया l 
  5. इसके साथ ही रावी व्यास जल विवाद के लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन किया जाना था l 
  6. उग्रवाद से प्रभावित लोग को मुआवजा दिया जाना था l 
  7. पंजाब से विशेष सुरक्षा बल वापस लिया जाना शामिल था l 
शांति स्थापित करना 
  1. पंजाब समझौते के लगभग एक दशक तक पंजाब में हिंसा होती रही l 
  2. उग्रवाद को दबाने में की गयी कार्यवाहियों में व्यापक रूप से मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ l 
  3. जैसे तैसे पंजाब में लोकतंत्र को बहल करने के लिए 1992 में चुनाव करवाए गए l इस चुनाव में मात्र 24 जनता ही मत डालने आयी l 
  4. उग्रवाद को 1992 में आख़िरकार दबा दिया गया लेकिन इससे पंजाब की जनता को काफी दुःख उठाना पड़ा l 
  5. 1997 के चुनाव के बाद यहाँ अकालीदल और भाजपा के गठबंधन की सरकार बनी l
  6. पंजाब अब धर्मनिरपेक्षता की ओर चल पड़ा है l 1997 से यहाँ पर शांति बनी हुई है l 

पूर्वोत्तर के राज्य 

  1. भारत के उत्तर पूर्व में 7 राज्य अरुणांचल, असम,मेघालय,लगालैंड,मणिपुर,मिजोरम,और त्रिपुरा है l इस सातो राज्यों को सात बहिन के नाम से जाना जाता है l 
  2. त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय खासी पहाड़ी क्षेत्र में आते है l इन तीनो ही राज्यों का गठन सन 1972 में हुआ था l 
  3. नागालैंड का गठन 1960 में हुआ था वही अरुणांचल प्रदेश और मिजोरम का गठन 1986 में किया गया था l 
  4. पूर्वोत्तर के राज्यों में मुख्य रूप से तीन मुद्दे हावी रहे ये थे : स्वयायात्ता की मांग , अलगाव के आन्दोलन और बाहरी लोगो का विरोध l 

 स्वायतत्ता की मांग 

  1. पहले पूर्वोत्तर में केवल तीन राज्य असम, मणिपुर और त्रिपुरा थे l 
  2. केंद्र सरकार ने अलग अलग समय पर असम को बांटकर मेघालय, अरुणांचल प्रदेश और मिजोरम बनाया l 
  3. समय समय पर पूर्वोत्तर के अलग अलग जनजातीय समुदायों ने स्वायतत्ता की मांग की l बड़े जनजातीय समुदायों ने मिलकर “इस्टर्न इंडिया ट्राइबल यूनियन” बनाया जो बाद में चलकर “आल पार्टी हिल्स कांफ्रेंस” में तब्दील हो गया l 
  4. लगातार होते धरने प्रदर्शन और अन्द्लोलन से केंद्र सरकार को इनकी मांगो को मानना पड़ा l 

अलगाववादी आन्दोलन 

मिजो नेशनल फ्रंट 

  1. मिजोरम के लोगो का मानना था की वे कभी भी ब्रिटिश इंडिया के अधीन नहीं रहे इसलिए वे स्वतंत्र देश बनाने की मांग करने लगे l 
  2. 1959 में मिजो पर्वतीय इलाके में अकाल पड़ा और असम सरकार ने इसकी उपेक्षा की जिसकी वजह से लोगो में भारी असंतोष पनपा और इससे अलग राष्ट्र बनाने की मांग को बल मिला l 
  3. गुस्साए लोगो ने लालडेन्गा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट की स्थापना की और 1966 में आज़ादी की मांग करते हुए सशत्र अभियान शुरू किया l 
  4. भारतीय सेना और मिजो विद्रोहियों के बीच लगभग दो दशकों तक गुरिल्ला युद्ध चला l 
  5. तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में मिजो विद्रोहियों ने अपने ठिकाने बनाये l दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा l
  6. आखिरकार भारत सरकार और मिजो विद्रोहियों के बीच समझौता हुआ 1986 में लालडेन्गा और राजीव गाँधी के बीच में समझौता हुआ और मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला l 
  7. आज मिजोरम पूर्वोत्तर का सबसे शांत राज्य है l उसने कला, साहित्य और विकास की दिशा में प्रगति की है l 

बाहरी लोगो के खिलाफ आन्दोलन 

  1. पूर्वोत्तर की एक सबसे बड़ी समस्या बाहरी लोगो का आकर यहाँ बस जाना था l आप्रवासियों को यहाँ के लोग अपने लिए खतरा मानते थे l 
  2. अप्रवासी उनके रोजगार, भूमि और संसाधनों पर अपना कब्ज़ा कर रहे है ऐसा पूर्वोत्तर के लोगो का मानना है l 
  3. 1979 से 1985 तक असम में बाहरी लोगो के खिलाफ काफी बड़े स्तर पर आन्दोलन हुए l स्थानीय निवासी उन्हें अपने राज्य से बहार करना चाहते थे l 
  4. असामी लोगो का यह मानना है की बांग्लादेश से आकर बसे मुस्लिमों को अगर वापस नहीं भेजा गया तो असामी लोग एक दिन अल्पसंख्यक हो जायेंगे l 
  5. असम में चाय, कॉफ़ी और तेल, कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधन होते हुए भी वहाँ बहुत बड़े स्तर पर गरीबी है l इसका मुख्य कारण बंगलादेशी आप्रवासियों को माना जाता है l 

AASU (ऑल असम स्टूडेंट यूनियन )

  1. आसू असम का एक छात्र संगठन था जिसका किसी भी राजनितिक दल से कोई सम्बन्ध नहीं था l 
  2. इस संगठन ने विदेशियों को असम से बहार निकालने के लिए बहुत जी जबरदस्त आन्दोलन चलाया l 
  3. आसू का आन्दोलन अवैध अप्रवासी, बंगाली और अन्य लोगो जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज कर लिए गए थे को असम से बाहर निकालना था l 
  4. उनकी मांग थी की 1951 से पहले आने वाले सभी आप्रवासियों को असम से बहार निकला जाएँ l 
  5. आन्दोलन से व्यापक स्तर पर जान माल की हानि के साथ साथ तेल और रेलगाड़ियों की आवाजाही को रोकने की कोशिश की गयी हैं l 
  6. 6 वर्षों तक चले आन्दोलन का आखिरकार केंद्र सरकार के साथ समझौता होने के साथ अंत हुआ l 
  7. 1985 में समझौता हुआ और समझौते के अनुसार बांग्लादेश युद्ध के दौरान और उसके बाद आये बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा जायेगा l  
  8. समझौते के बाद आसू असम गण संग्राम परिषद् के साथ मिलकर एक राजनितिक पार्टी बन गयी l जिसका नाम था असम गण परिषद् l 
  9. अब असम में शांति है परन्तु बाहरी लोगो का मुद्दा अभी हल नहीं हुआ है l 
  10. बहुत बाद में केंद्र सरकार ने आखिरकार समझौते पर अमल करते हुए सन 2017 में असम का नागरिकता रजिस्टर (National Register of Citizenship NRC) की पहली लिस्ट जरी की है l
  11. NRC में 3.39 में से 2.89 करोड़ लोगो को नागरिकता के योग्य पाया गया है l लगभग 40 लाख लोगो को बाहरी माना गया है l 

क्षेत्रीय आकाँक्षाओं से मिलने वाले सबक 

  1. पहला सबक यह है की क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतान्त्रिक राजनीति का अभिन्न अंग है l 
  2. दूसरा सबक यह है की क्षेत्रीय आकाँक्षाओं को दबाने की जगह उनके साथ लोकतान्त्रिक बातचीत का तरीका अपनाना सबसे अच्छा होता है l 
  3. तीसरा सबक सत्ता की साझेदारी के महत्त्व को समझना है l इसके अनुसार विभिन्न दलों और समूहों को केन्द्रीय राजव्यवस्था में हिस्सेदार बनाना जरूरी है l 
  4. चौथा सबक यह है की आर्थिक विकास में सभी क्षेत्रों के साथ समानता का व्यवहार करना चाहियें l पिछड़ें राज्यों की आर्थिक मदद करके उनको विकास की रह पर लेकर आये l 













Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!